May 25, 2019 10:52 PM
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कैसे पड़ा ज्येष्ठ महीने का नाम?,ज्येष्ठ मास का वैज्ञानिक महत्व क्या है?जानें कब से हैं शुरू


हिन्दू कैलेंडर में ज्येष्ठ का महीना तीसरा महीना होता है. इस महीने में सूर्य अत्यंत ताक़तवर होता है, इसलिए गर्मी भी ज्यादा होती है. सूर्य की ज्येष्ठता के कारण इस माह को ज्येष्ठ कहा जाता है. ज्येष्ठा नक्षत्र के कारण भी इस माह को ज्येष्ठ कहा जाता है. इस महीने में धर्म का सम्बन्ध जल से जोड़ा गया है, ताकि जल का संरक्षण किया जा सके. इस मास में सूर्य और वरुण देव की उपासना विशेष फलदायी होती है. इस बार ज्येष्ठ मास 19 मई से 17 जून तक रहेगा.

कैसे पड़ा ज्येष्ठ महीने का नाम?
ज्येष्ठ का महीना वैशाख के महीने के बाद आता है. अंग्रेजी कैलेंडर की बात करें तो ये महीना हमेशा जून और मई के महीने में ही आता है. माना जाता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होता है. इसलिए इस महीने को ज्येष्ठ नाम दिया गया है.

ज्येष्ठ मास का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
– इस माह में वातावरण और शरीर में जल का स्तर गिरने लगता है.

– अतः जल का सही और पर्याप्त प्रयोग करना चाहिए.

– सन स्ट्रोक और खान पान की बीमारियों से बचाव आवश्यक है.

– इस माह में हरी सब्जियां, सत्तू, जल वाले फलों का प्रयोग लाभदायक होता है.

– इस महीने में दोपहर का विश्राम करना भी लाभदायक होता है.

ज्येष्ठ के मंगलवार की क्या महिमा है?
– ज्येष्ठ के मंगलवार को श्री हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है.

– इस दिन श्री हनुमान जी को तुलसी दल की माला अर्पित की जाती है.

– साथ ही हलवा पूरी या मीठी चीज़ों का भोग भी लगाया जाता है.

– इसके बाद उनकी स्तुति करें.

– निर्धनों में हलवा पूरी और जल का वितरण करें.

– ऐसा करने से मंगल सम्बन्धी हर समस्या का निदान हो जाएगा.

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