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बंगाल में ममता के फ्रंट एक्शन से पूरा विपक्ष ममता के साथ

16 मई 2019

फाइल फोटो

लोकसभा चुनाव 2019 की आखिरी जंग जो बंगाल में लड़ी जा रही है उस पर पूरे देश की नजरें हैं । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच आर-पार की लड़ाई जारी है । ममता पूरे दमखम के साथ बीजेपी का सामना कर रही हैं तो विपक्ष की दूसरी पार्टियां भी उनके साथ आ गई हैं । मायावती से लेकर राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने ममता का समर्थन किया है । ऐसे में चुनाव खत्म होते-होते एक बार फिर वही स्थिति पैदा हो गई है जो चुनाव से पहले थी, जहां ममता बनर्जी के पीछे पूरा विपक्ष खड़ा था और वह अगुवाई कर रही थीं।

विपक्ष जब ममता के साथ आया, तो उन्होंने भी ट्वीट कर हर किसी का धन्यवाद दिया । चुनाव नतीजों से पहले विपक्ष की ये एकता भारतीय जनता पार्टी की चिंता बढ़ा सकती है, तो वहीं ममता बनर्जी को भी विपक्षी नेताओं की प्रमुख रेस में आगे खड़ा कर सकती हैं ।

कई बार ऐसे मौके आए हैं जहां पर किसी एक नेता के पीछे विपक्षी पार्टियां खड़ी हुई नहीं दिखी हैं, लेकिन हर बार ममता बनर्जी ने इस मिथ्या को तोड़ा है और पिछले कुछ महीने में दो बार वह विपक्ष को एक साथ एक मंच पर ले आई हैं ।

ये बिल्कुल वैसे ही हुआ है जो चुनाव ऐलान से पहले हुआ था । जब ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपने साथी राजीव कुमार को लेकर मोर्चा खोल दिया था । ममता बनर्जी ने केंद्र के खिलाफ 72 घंटे का धरना दिया था । 19 जनवरी को ममता बनर्जी ने संयुक्त रैली भी बुलाई थी, जिसमें 22 विपक्षी दलों के 44 नेता एक मंच पर थे और इन सभी की अगुवाई ममता बनर्जी ने ही की थी ।

दरअसल, बीते कुछ साल में ममता बनर्जी ही एक ऐसे नेता के तौर पर उभरी हैं जिन्होंने अमित शाह और नरेंद्र मोदी की जोड़ी का सामना खुलकर किया है । हर मोर्चे पर ममता ने केंद्र सरकार की मुखालफत की है और नरेंद्र मोदी के खिलाफ दीवार की तरह खड़ी हैं।बंगाल की 42 लोकसभा सीटों पर बीजेपी इस बार नंबर दो की लड़ाई लड़ रही है, तो वहीं टीएमसी की पूरी कोशिश बीजेपी को रोकने की है ।

बतादें कि कोलकाता में अमित शाह के रोड शो में जो बवाल हुआ, उसके बाद ममता पूरे देश में चर्चित हो गयी हैं । पूरे देश की निगाह अब बंगाल पर है । बंगाल की राजनीति में माहौल को देखते हुए चुनाव आयोग ने बड़ा एक्शन लिया । चुनाव आयोग ने बंगाल में प्रचार के समय को कम कर दिया और उसे गुरुवार रात 10 बजे तक सीमित कर दिया । जिसके बाद ममता बनर्जी लगातार बीजेपी, चुनाव आयोग पर निशाना साध रही हैं ।

अब तो कांग्रेस ने भी बहुमत न मिलने की स्थिति में गठबंधन के संकेत दिए हैं। यही नहीं कांग्रेस का कहना है कि यदि उसे गठबंधन में पीएम का पद नहीं मिलता है, तब भी उसे कोई समस्या नहीं होगी। कांग्रेस के सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पार्टी का एकमात्र उद्देश्य एनडीए को केंद्र में एक बार फिर से सरकार गठन से रोकना है ।

आजाद ने कहा, ‘हम पहले ही अपना स्टैंड क्लियर कर चुके हैं। यदि कांग्रेस के पक्ष में सहमति बनती है तो हम नेतृत्व स्वीकार करेंगे। लेकिन, हमारा लक्ष्य हमेशा यह रहा है कि एनडीए की सरकार सत्ता में वापस नहीं लौटनी चाहिए। हम सर्वसम्मति से लिए गए फैसले के साथ जाएंगे।’ कांग्रेस लीडर का यह कहना इस बात का संकेत है कि पार्टी आम चुनाव के नतीजों को लेकर बहुत उत्साहित नहीं दिख रही है और बीजेपी को रोकने की कीमत पर गठबंधन में बड़े त्याग के लिए भी तैयार है।

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