June 26, 2019 2:10 AM
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गंगा दशहरा : इस दिन स्नान का होता है विशेष महत्व, इन चीजों करें दान

हर वर्ष ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है । स्कंदपुराण के अनुसार, गंगा दशहरे के दिन व्यक्ति को किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। इस दिन ध्यान व दान करना चाहिए। इससे सभी पापों से मुक्ति मिलती है।गंगा दशहरा का महत्व:
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन राजा भगीरथ गंगा को धरती पर लाए थे। इस दिन गंगा धरती पर अवतरित हुईं थीं। इस विशेष दिवस को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। इसे हम गंगावतरण के नाम से भी जानते हैं। इस अवसर पर लोग गंगा में स्नान करते हैं और गरीबों को दान करते हैं।शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान श्रीहरि विष्णु के चरणों से निकली और भगवान शिवशंकर की जटाओं में लिपटी गंगा के जल में डुबकी लगाने से मनुष्य को विष्णु और शिव का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है। मान्यता है कि राजा भगीरथ के पूर्वजों को श्राप मिला था, जिसकी वजह से उन्होंने गंगा को धरती पर लाने के लिए घोर तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता गंगा ने उन्हें दर्शन दिए।इस दिन स्नान का होता है विशेष महत्व, इन चीजों करें दान:
राजा भगीरथ ने कहा कि आप मृत्युलोक चलिए। इस पर मां गंगा ने कहा कि जिस समय मैं पृथ्वीतल पर गिरूं, उस समय मेरे वेग को कोई संभालने वाला होना चाहिए। ऐसा न होने पर पृथ्वी को फोड़कर मैं रसातल में चली जाऊंगी। इसके बाद भगीरथ ने भगवान शिवशंकर की तपस्या की। भगवान शिवशंकर प्रसन्न होकर गंगाजी को अपनी जटाओं में रोकने के लिए तैयार हो जाते हैं। गंगा को अपनी जटाओं में रोककर एक जटा को पृथ्वी की ओर छोड़ देते हैं।इस प्रकार गंगा के जल से भगीरथ अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने में सफल हो जाते हैं। पृथ्वी पर आने से पहले, मां गंगा भगवान ब्रह्मा के कमंडल में रहती थीं। मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।इस दिन सत्तू, मटका और हाथ का पंखा दान करने से दोगुना फल प्राप्त होता है। गंगा दशहरा के दिन सभी गंगा मंदिरों में भगवान शिवशंकर का अभिषेक किया जाता है। मोक्षदायिनी मां गंगा की पूजा-अर्चना की जाती है। गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालु जिस भी वस्तु का दान करें उनकी संख्या दस होनी चाहिए। दस वस्तुओं से ही पूजन भी करना चाहिए।

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