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नम आंखों से लोगों ने किया आलम साहब को रुखसत, हुए सुपुर्दे खाक

11 जून 2019

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । अपने जमाने के मशहूर शायर मुनीर बख्श आलम को उनके पैतृक आवास बनौरा के कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक कर दिया गया। आलम साहब के जनाजे में सैकड़ों की तादात में लोग सम्मिलित हुए। बताते चलें कि कल 76 वर्ष की अवस्था में प्रख्यात शायर मुनीर बख्श आलम का इंतकाल हो गया था। 80-90 के दशक में मुनीर बक्शी आलम के आवास पर शायरी सुनने वालों की महफ़िल जमा होती थी और वहाँ वाहा-वाही का दौर चलता था । लेकिन समय के साथ यह दौर भी पीछे छूटता चला गया, वजह बना आलम साहब की सेहत। डॉक्टरों ने आलम साहब को शुगर और ब्लड प्रेसर सरीखी बीमारियाँ बताई। विगत कुछ वर्षों से आलम साहब की तबियत नासाज चल रही थी और वे डायलिसिस पर थे। कल देर शाम उन्होंने अपने पैतृक आवास पर अंतिम सांस ली।

बड़े शायरों में होती थी गिनती

भले ही आलम साहब सोनभद्र जैसे पिछड़े जनपद से जुड़े थे मगर उनके ताल्लुकात बड़े- बड़े लोगों से रहा। मुनीर बख्स आलम साहब देश में कई नामचीन शायरों के साथ मुशायरे का मंच साझा किया। जिसके वजह से आलम साहब को कई मशहूर पुरस्कार से भी नवाजा गया। आलम साहब के कद में उस दिन और चार-चांद लग गया जब उन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब की मिशाल पेश करते हुए यथार्थ गीता का उर्दू अनुवाद किया । जिसकी वजह से वे महाराज अड़गड़ानंद जी के काफी करीब आ गए । बताया जाता है कि महाराज भी आलम साहब जैसे नेक इंसान से मिलकर काफी खुश हुआ करते थे । मगर खराब सेहत की वजह से उनका आना-जाना काफी कम हो गया था ।

जनपद न्यूज Live की टीम ने किया था सम्मानित

पिछली ईद पर जनपद न्यूज़ लाइव की टीम ने उनके आवास पर जाकर ईद की बधाई देने के साथ उनका स्वास्थ्य हाल जाना था और उन्हें सम्मानित भी किया था। इस दौरान उन्होंने कई शायरियाँ सुनाई और इत्र लगा जनपद न्यूज़ लाइव की टीम को भी ईद की बधाइयां भी दी थीं ।

जिस्म तो खाक है और खाक में मिल जाएगा, मैं बहरहाल किताबों में मिलूंगा।“जनपद न्यूज़ लाइव की टीम की तरफ से आलम साहब को श्रद्धांजलि”

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