Sonbhadra News : प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म, जनता के संघर्ष के आगे झुकी सरकार - भाकपा
प्रदेश सरकार द्वारा प्रीपेड स्मार्ट मीटर संयोजन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के फैसले को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने जनता के संघर्ष की बड़ी जीत बताया है। पार्टी ने सरकार पर जनविरोधी........

उत्तर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी सदस्य एवं जिला सचिव कामरेड आर0के0 शर्मा.....
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4:50 PM, May 7, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । प्रदेश सरकार द्वारा प्रीपेड स्मार्ट मीटर संयोजन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के फैसले को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने जनता के संघर्ष की बड़ी जीत बताया है। पार्टी ने सरकार पर जनविरोधी नीतियाँ थोपने का आरोप लगाते हुए मांग की है कि प्रदेशभर में उपभोक्ताओं के यहां लगाए गए स्मार्ट मीटर बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के हटाए जाएं और पूर्व की तरह विभागीय मीटर व्यवस्था बहाल की जाए।
यह बातें भाकपा के उत्तर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी सदस्य एवं जिला सचिव कामरेड आर0के0 शर्मा ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को जनता के भारी विरोध के आगे आखिरकार पीछे हटना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था के खिलाफ भाकपा सहित कई जन संगठनों के बैनर तले लगातार आंदोलन चलाया जा रहा था, जिसके दबाव में सरकार को यह निर्णय लेना पड़ा।
भाकपा नेता ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बिजली के निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए लगातार नीतियों में बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ऐसी योजनाएं लागू करती है, जिनसे आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़े और लोग परेशान रहें। लेकिन जब जनता एकजुट होकर विरोध करती है तो सरकार चुनावी दबाव में अपने फैसले वापस लेने को मजबूर हो जाती है।
कामरेड आर0के0 शर्मा ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार ने किस आधार पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर को अनिवार्य घोषित किया था और अब उसे वापस लेने का कारण क्या है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सामने इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
भाकपा ने मांग की कि जिन उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, उन्हें बिना अतिरिक्त शुल्क के हटाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में आज भी डिजिटल नेटवर्क की स्थिति बेहद कमजोर है, ऐसे में स्मार्ट मीटर जैसी व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है।
उन्होंने कहा कि आने वाले पंचायत चुनाव और 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार जनता की नाराजगी से डर गई है। यही कारण है कि विरोध बढ़ने पर सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा।
भाकपा नेता ने कहा कि यदि जनता इसी तरह संगठित और एकजुट रही, तो सरकार की जनविरोधी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक नीतियों को बदलवाया जा सकता है।




