Sonbhadra News : अब बदमाशों की खैर नहीं... 'यक्ष' ऐप में रहेगा फोटो, फिंगरप्रिंट और वॉइस सैंपल तक का रिकॉर्ड

जिले में पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए एआई की मदद ले रही है। सीसीटीवी कैमरों के साथ 3-डी कैमरे तक का प्रयोग किया जा रहा है। अब जल्द ही पुलिस के पास अपराधियों की यूनिक आईडी होगी। आधार की तरह........

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एसपी सोनभद्र अभिषेक वर्मा......

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9:19 PM, April 2, 2026

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । जिले में पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए एआई की मदद ले रही है। सीसीटीवी कैमरों के साथ 3-डी कैमरे तक का प्रयोग किया जा रहा है। अब जल्द ही पुलिस के पास अपराधियों की यूनिक आईडी होगी। आधार की तरह डाटा फीड होगा। घर-घर जाकर आरोपियों के फोटो और फिंगर प्रिंट लिए जाएंगे। इससे एक क्लिक पर अपराधी की जानकारी पुलिस को मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर मिल जाएगी। जनपद के 621 गांव और मोहल्लों की मैपिंग पूरी हो चुकी है। ऐसे में अब तक तीन हजार से अधिक अपराधियों का डिजिटल डाटा ऐप में फीड किया जा चुका है।

यक्ष ऐप में अब तक किया गया जिले के तीन हजार से अधिक अपराधियों का ब्यौरा फीड -

एसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि "जिले में यक्ष ऐप में अब तक तीन हजार से अधिक अपराधी पंजीकृत है, इनमें 21 श्रेणियों के डकैती, लूट, चोरी, हत्या, धोखाधड़ी, छेड़छाड़, साइबर अपराध, गुंडा, गैंगस्टर आदि के मामलों के अपराधी शामिल हैं। इनका डाटा यक्ष एप पर फीड किया जा रहा है। कई बार चोरी और लूट के मामले में पुलिस को फुटेज मिलने के बाद भी अपराधियों की पहचान करने में समय लग जाता है, ऐसे में घटनाओं के खुलासे में देरी होती है। इसके साथ ही किसी अपराधी के पकड़े जाने पर उसका आपराधिक इतिहास खंगालना भी टेढ़ी खीर होता है। जनपद में कुल 621 गांव और मोहल्लों की डिजिटल मैपिंग का काम पूरा कर लिया गया है। इस मैपिंग के माध्यम से हर इलाके की भौगोलिक और प्रशासनिक जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध हो गई है। इसका सबसे बड़ा फायदा बीट पुलिसिंग को होगा। डिजिटल रिकॉर्ड होने से पुलिस को अपराधियों की पहचान, लोकेशन और गतिविधियों के बारे में जल्दी जानकारी मिल सकेगी। आने वाले समय में भी आधुनिक तकनीक और डिजिटल सिस्टम का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करना तथा आम नागरिकों को सुरक्षित माहौल देना है। यक्ष ऐप के जरिए तैयार किया गया यह डिजिटल डेटा भविष्य में अपराध नियंत्रण, पुलिस योजना और त्वरित कार्रवाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे पुलिस को यह समझने में आसानी होगी कि किस इलाके में कितनी आबादी है और वहां सुरक्षा के लिए कितने संसाधनों की जरूरत है। इसके आधार पर पुलिस गश्त, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।"

एसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि "यक्ष एप के माध्यम से फोटो डालने पर एआई की मदद से पहचान हो जाएगी। अगर फोटो से नहीं मिल पा रहा है तो आवाज का सैंपल लेकर भी इस एप पर डाल दिया जाएगा। इसका प्रयोग लूट, डकैती जैसी घटनाओं में ही हो सकेगा। एक क्लिक पर अपराधी की जानकारी होगी। अन्य जिले में पकड़े जाने पर भी वहां की पुलिस डाटा फीड करेगी। एक से अधिक अपराध मिलने पर यूनिट आईडी से पुराना रिकॉर्ड सामने आ जाएगा। जेल से बाहर आने पर भी नोटिफिकेशन मिलेगा, उनका सत्यापन किया जाएगा।"

पहले से हैं त्रिनेत्र और पहचान ऐप -

पूर्व में पुलिस के पास त्रिनेत्र और पहचान ऐप भी हैं। त्रिनेत्र एप में जेल भेजे गए अपराधी का पूरा डोजियर तैयार होता है। इसमें अंगूठे की छाप ली जाती है। इसमें परिजन की जानकारी होती है। निवास स्थान का ब्योरा भरा जाता है। पहचान ऐप में अपराधी का नाम और उसके बारे में ही जानकारी होती है। अब यक्ष एप में एफआईआर और आरोप पत्र में सामने आई जानकारी को दर्ज किया जाएगा। अपराधी की आवाज का भी नमूना होगा, फोटो भी होगी।

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