Sonbhadra News : जिलाध्यक्ष पर आरोपों की आंधी, भाजपा में बढ़ी दरार, समर्थन और विरोध में आमने-सामने कार्यकर्ता
भाजपा संगठन में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष के बीच शुरू हुआ विवाद अब ‘दो फाड़’ की स्थिति में बदलता नजर आ रहा है। एक ओर जहां कई मंडल अध्यक्षों ने नाराजगी जताते....

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5:29 PM, April 17, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । भाजपा संगठन में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष के बीच शुरू हुआ विवाद अब ‘दो फाड़’ की स्थिति में बदलता नजर आ रहा है। एक ओर जहां कई मंडल अध्यक्षों ने नाराजगी जताते हुए सोशल मीडिया पर इस्तीफा दे दिया, वहीं दूसरी ओर कुछ कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष के समर्थन में उतरकर अलग ही सियासी संदेश दे रहे हैं। इस खींचतान ने पार्टी संगठन की एकजुटता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब भाजपा कार्यालय में आयोजित एक आवश्यक बैठक के दौरान नौडीहा के बूथ अध्यक्ष उमेश चौबे थोड़ी देर से पहुंचे। आरोप है कि इस पर मंडल अध्यक्ष ने बताया कि जिलाध्यक्ष ने उनका नाम पूछते हुए उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किया और उन्हें बैठक से बाहर कर दिया। इस घटना से आहत होकर उमेश चौबे ने सोशल मीडिया पर अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफों की झड़ी, वरिष्ठों की नसीहत -
घटना के बाद कई मंडल अध्यक्षों ने भी जिलाध्यक्ष के रवैए पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर इस्तीफा दे दिया। पार्टी के पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी सामने आकर संगठन को संभालने और कार्यकर्ताओं को जोड़कर रखने की नसीहत दी। म्योरपुर में तो स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने बैठक कर निंदा प्रस्ताव तक पारित कर दिया।
समर्थन और विरोध, दोनों खेमे सक्रिय -
विवाद यहीं नहीं थमा। मंगलवार से कई भाजपा कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष के समर्थन में भी खुलकर सामने आ गए। समर्थक गुट ने बैठक कर विरोध करने वालों को जवाब देने की कोशिश की, जिससे संगठन के भीतर खेमेबाजी और साफ नजर आने लगी है।
संगठन पर पड़ सकता है असर -
लगातार बढ़ रही इस अंदरूनी खींचतान से पार्टी की छवि और संगठनात्मक मजबूती पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती दूरी और सार्वजनिक मंचों पर सामने आ रही नाराजगी आने वाले समय में भाजपा के लिए चुनौती बन सकती है।
अब शीर्ष नेतृत्व पर निगाहें -
पूरे घटनाक्रम के बाद अब सबकी निगाहें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को कैसे सुलझाता है और संगठन में संतुलन कैसे कायम करता है। फिलहाल, सोनभद्र भाजपा में जारी यह ‘सियासी संग्राम’ थमता नजर नहीं आ रहा।



