Sonbhadra News : स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट का जाल, सरकारी व्यवस्था पर उठे सवाल

प्रदेश में चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी किसी से छिपी नहीं है। बाकी कसर अटैचमेंट ने पूरी कर दी है। स्थिति ये कि कई दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टर-कर्मचारी नहीं हैं और यहां सुगम में कर्मचारी कई-कई..

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1:01 AM, April 6, 2026

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । प्रदेश में चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी किसी से छिपी नहीं है। बाकी कसर अटैचमेंट ने पूरी कर दी है। स्थिति ये कि कई दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टर-कर्मचारी नहीं हैं और यहां सुगम में कर्मचारी कई-कई साल से संबद्ध चल रहे हैं।प्रदेश की योगी सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और दूरदराज क्षेत्रों में चिकित्सकीय व्यवस्था मजबूत करने के दावे करती हो, लेकिन अति पिछड़े जिलों में शामिल सोनभद्र में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। जिले में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य कर्मियों और कर्मचारियों का अटैचमेंट किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। 

मिली जानकारी के अनुसार, जिले के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और उप स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को मूल तैनाती स्थल से हटाकर अन्य स्थानों पर अटैच कर दिया गया है। इसके चलते कई स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों और स्टाफ की कमी हो गई है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं सूत्रों की मानें तो सबसे अधिक अटैचमेंट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) शहरी में किए गए हैं। कई स्वास्थ्य कर्मियों और कर्मचारियों को उनके मूल तैनाती स्थल से हटाकर पीएचसी शहरी से संबद्ध कर दिया गया है, जिससे अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार जहां गांवों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के अटैचमेंट के कारण कई स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था चरमरा गई है। कई जगहों पर डॉक्टर और कर्मचारी उपलब्ध न होने से मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक अटैचमेंट की यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही है और कई कर्मचारी वर्षों से अपने मूल तैनाती स्थल के बजाय अन्य स्थानों पर कार्य कर रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।

वहीं स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है कि यदि कर्मचारियों को उनके मूल तैनाती स्थल पर ही कार्य करने दिया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं काफी हद तक बेहतर हो सकती हैं।

"ऐसे में अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।"

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