UP News : बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री निलंबित, कमिश्नर करेंगे पूरे मामले की जांच
यूपी में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की वजह UGC का नया कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई बताई है।

bareilly
2:05 PM, January 27, 2026
यूपी में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की वजह UGC का नया कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई बताई है। हालांकि उनका इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं हुआ है लेकिन सरकार ने उनके कदम को अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखते हुए पूरे मामले की जांच बरेली मंडलायुक्त को सौंप दी है।
इस बीच, अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली कलेक्ट्रेट गेट पर धरना दिया। फिर प्रशासन ने कलेक्ट्रेट गेट खुलवाया, तब वो अंदर गए। उनका आरोप है कि डीएम के मोबाइल पर लखनऊ से आई एक कॉल के दौरान उनके बारे में आपत्तिजनक बातें कही गईं, जिनका वे जवाब चाहते हैं। सुरक्षा के मद्देनजर कलेक्ट्रेट गेट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ।
यूपी में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की वजह UGC का नया कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई बताई है। हालांकि उनका इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं हुआ है लेकिन सरकार ने उनके कदम को अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखते हुए पूरे मामले की जांच बरेली मंडलायुक्त को सौंप दी है।
इस बीच, अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली कलेक्ट्रेट गेट पर धरना दिया। फिर प्रशासन ने कलेक्ट्रेट गेट खुलवाया, तब वो अंदर गए। उनका आरोप है कि डीएम के मोबाइल पर लखनऊ से आई एक कॉल के दौरान उनके बारे में आपत्तिजनक बातें कही गईं, जिनका वे जवाब चाहते हैं। सुरक्षा के मद्देनजर कलेक्ट्रेट गेट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ।
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफा में उत्तर प्रदेश सिविल सेवा वर्ष 2019 बैच का अपने को राजपत्रित अधिकारी बताया है। साथ ही उन्होंने अपनी शिक्षा दीक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में होने का जिक्र किया है। उन्होंने सीधे राज्यपाल को संबोधित करते हुए कहा है कि प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द एवं उनके शिष्य, बटुक, ब्राह्मणों से स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की।
वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर एवं उसकी शिखा को पकड़कर घसीटकर पीटा गया और उसकी मर्यादा का हनन किया गया। i
इस प्रकरण से यह प्रतीत होता है कि स्थानीय प्रशासन एवं वर्तमान की राज्य सरकार एक ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है एवं साधु संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है।



