जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा, कैश कांड को लेकर थे चर्चा में
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह इस्तीफा देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा है।

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2:42 PM, April 10, 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह इस्तीफा देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा है।
जस्टिस वर्मा पिछले कुछ समय से एक कथित “कैश कांड” को लेकर चर्चा में थे। बीते साल मार्च में उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगने की घटना सामने आई थी। इस दौरान वहां से नोटों के जले हुए बंडल मिलने के दावे किए गए थे, जिसके बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया।
करीब 13 महीने तक चले विवाद, जांच और संभावित महाभियोग की अटकलों के बीच शुक्रवार को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि वह “अत्यंत पीड़ा के साथ तत्काल प्रभाव से” पद छोड़ रहे हैं और इस गरिमामय पद पर उन कारणों का बोझ नहीं डालना चाहते, जिन्होंने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
भारत में न्यायपालिका को लोकतंत्र का एक स्वतंत्र और मजबूत स्तंभ माना जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई या गिरफ्तारी संभव है।
कानून के अनुसार, देश में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह कितने ही उच्च पद पर क्यों न हो। हालांकि, न्यायाधीशों के मामले में विशेष संवैधानिक प्रावधान लागू होते हैं। किसी जज के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके लिए एक निर्धारित और सख्त प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है, जिसमें उच्च स्तर की अनुमति और जांच शामिल होती है।
यह पूरा घटनाक्रम न केवल न्यायपालिका की साख से जुड़ा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जवाबदेही और पारदर्शिता जैसे मुद्दे सभी संवैधानिक पदों पर समान रूप से लागू होते हैं।



